कोलकाता, 24 सितंबर। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह के आवंटन पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। नवगठित डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को चुनाव चिह्न आवंटन पर सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से चुनाव आयोग को निष्पक्षता से कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।
यह मामला तब सामने आया जब चुनाव आयोग ने आगामी उपचुनावों के लिए डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को 'लिफाफा' चुनाव चिह्न आवंटित किया। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ), जो नंदीग्राम उपचुनाव भी लड़ रहा है, ने आवंटन पर आपत्ति जताई थी। इस प्रतीक का उपयोग पहले आईएसएफ द्वारा किया गया था।
सुनवाई के दौरान, अदालत ने सवाल किया कि चुनाव आयोग ने 'लिफ़ाफ़ा' चुनाव चिह्न क्यों चुना, जबकि उसके सामने मौजूद सामग्री के अनुसार, 183 मुफ़्त चुनाव चिह्न उपलब्ध थे. कोर्ट ने इस संदर्भ में सवाल उठाया कि आईएसएफ भी चुनाव लड़ रही है. :contentReference[oaicite:6]{index=6}
अदालत ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि संबंधित प्रतीक को एक तरफ रखकर स्थिति से बचा जा सकता था। चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली आईएसएफ याचिका की सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां की गईं।
सुनवाई में चुनाव चिन्हों के आवंटन को नियंत्रित करने वाली प्रक्रिया और नियमों पर भी चर्चा हुई। इस स्तर पर अदालत की टिप्पणियाँ मौखिक टिप्पणियाँ हैं, जबकि अंतिम स्थिति आगे की कार्यवाही और किसी भी बाद के आदेश पर निर्भर करेगी।
चुनाव चिह्न पर विवाद अब नंदीग्राम उपचुनाव से संबंधित न्यायिक कार्यवाही का हिस्सा बन गया है। उम्मीद है कि चुनाव आयोग आगे की कार्यवाही में आवंटन और लागू नियमों के संबंध में अपना स्पष्टीकरण अदालत के समक्ष रखेगा।




