मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड बेचने का बड़ा फैसला किया है।
Reuters के अनुसार यह बिक्री तीन चरणों में होगी और इसकी शुरुआत 16 सितंबर से होगी।
RBI ने क्या फैसला लिया?
RBI कुल ₹1 लाख करोड़ ($10.47 billion) के सरकारी बॉन्ड खुले बाजार में बेचने वाला है।
सरल भाषा में समझें तो RBI जब सरकारी सिक्योरिटीज बेचता है, तो वित्तीय प्रणाली से पैसा RBI की तरफ जाता है और सिस्टम में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी कम होती है।
RBI को अतिरिक्त पैसा क्यों निकालना पड़ रहा है?
Reuters के अनुसार बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त liquidity का एक कारण विशेष foreign-exchange mobilisation scheme के तहत आया करीब $127 billion का inflow है।
इस अतिरिक्त नकदी के कारण overnight market rates RBI के policy corridor की निचली सीमा से भी नीचे चले गए थे।
यही स्थिति RBI के लिए liquidity management की चुनौती पैदा करती है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
सबसे जरूरी बात:
यह आपके बैंक खाते से सीधे पैसा निकालने की कार्रवाई नहीं है।
RBI का कदम मुख्य रूप से banking और financial markets की liquidity को प्रभावित करेगा।
सरकारी बॉन्ड की बिक्री से bond yields और market liquidity में बदलाव हो सकता है।
अगर liquidity काफी सख्त होती है तो आगे चलकर borrowing costs पर असर पड़ सकता है। हालांकि retail loan rates पर वास्तविक प्रभाव कई दूसरे आर्थिक कारकों पर निर्भर करेगा।
तेल की कीमतों का भी कनेक्शन
यह फैसला ऐसे समय आया है जब geopolitical tensions के कारण global oil prices पर भी दबाव है।
भारत अपनी crude oil जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए महंगा तेल inflation और external balance पर असर डाल सकता है।
RBI के पास और भी विकल्प
RBI Governor Sanjay Malhotra ने संकेत दिया है कि केंद्रीय बैंक के पास liquidity manage करने के लिए कई tools मौजूद हैं।
Reuters के अनुसार, हाल के अन्य liquidity-management measures के बाद यह bond-sale operation सामने आया है।
अब बाजार किस पर नजर रखेगा?
बाजार इन चीजों पर खास नजर रखेगा:
Government bond yields
Overnight interest rates
Banking liquidity
Inflation expectations
Crude oil prices
RBI के अगले liquidity operations
निष्कर्ष
RBI का ₹1 लाख करोड़ का कदम monetary policy rate में बदलाव नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त liquidity को absorb करना है।
आम ग्राहकों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है कि RBI आपके बैंक खाते से पैसा नहीं निकाल रहा है। इसका असर पहले financial markets और banking liquidity के जरिए दिखाई देगा।
स्रोत: Reuters, Reserve Bank of India.



