चीन के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच इस बैठक की तैयारी की जा रही है। बीजिंग ने कहा है कि वह भारत के साथ संवाद बढ़ाना, सहयोग मजबूत करना और मतभेदों को उचित तरीके से संभालना चाहता है। चीन ने दोनों देशों को अच्छे पड़ोसी और एक-दूसरे की सफलता में सहयोग करने वाले साझेदार के रूप में आगे बढ़ने की बात कही है।
शी जिनपिंग की यह करीब सात साल में पहली भारत यात्रा है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब 2020 के लद्दाख तनाव के बाद भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं।
मोदी-शी बैठक क्यों अहम है?
भारत और चीन के रिश्ते 2020 के गलवान संघर्ष के बाद बेहद तनावपूर्ण हो गए थे।
इसके बाद 2024 में दोनों देशों के बीच सैन्य disengagement को लेकर समझौता हुआ और कई टकराव वाले स्थानों से सैनिक पीछे हटे।
Reuters के मुताबिक इसके बाद दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें बहाल हुई हैं, कारोबारी वीजा प्रक्रिया में कुछ आसानी हुई है और आर्थिक संपर्क भी बढ़ा है। हालांकि सीमा पर सैन्य मौजूदगी और कई रणनीतिक मतभेद अभी भी बने हुए हैं।
इसलिए मोदी-शी बैठक को तुरंत “भारत-चीन संबंधों का पूरा रीसेट” कहना सही नहीं होगा। लेकिन यह जरूर पता चल सकता है कि दोनों देश रिश्तों को स्थिर करने के लिए कितनी दूर तक जाने को तैयार हैं।
सीमा के साथ व्यापार भी बड़ा मुद्दा
भारत-चीन संबंधों में व्यापार असंतुलन एक बड़ी चिंता है।
Indian Express के मुताबिक दोनों देशों के बीच strategic economic dialogue की दिशा में काम हो सकता है। इसमें व्यापार घाटा, बाजार तक पहुंच, वीजा और भारत में चीनी निवेश जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।
Reuters के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में चीन भारत का सबसे बड़ा import source रहा और चीन से भारत का आयात करीब 132 अरब डॉलर रहा।
भारत के सामने चुनौती यह है कि वह चीनी बाजार में भारतीय कंपनियों की पहुंच बढ़ाए, महत्वपूर्ण supply chains को सुरक्षित रखे और रणनीतिक क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी चिंताओं से समझौता न करे।
सीमा पर क्या होता है, यह सबसे अहम रहेगा
व्यापारिक सहयोग को सुरक्षा संबंधों से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
2024 के disengagement के बाद स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन LAC पर विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है और दोनों देशों की सैन्य मौजूदगी बनी हुई है।
Indian Express के अनुसार मोदी और शी हाल की सीमा वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा कर सकते हैं।
क्या यह नया India-China reset है?
अभी इसे पूरी तरह नया reset कहना जल्दबाजी होगी।
चीन की भाषा जरूर पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक दिखाई दे रही है। भारत की तरफ से भी संवाद जारी है, लेकिन सीमा, व्यापार, निवेश और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे अभी काफी महत्वपूर्ण हैं।
अब किन बातों पर नजर रहेगी?
सीमा से जुड़े किसी नए ठोस फैसले पर
Strategic Economic Dialogue की औपचारिक शुरुआत पर
व्यापार घाटे और market access पर
चीनी निवेश और visa restrictions पर
दोनों नेताओं के आगे नियमित संवाद के roadmap पर
BRICS Summit 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में हो रहा है। भारत की BRICS अध्यक्षता का फोकस resilience, innovation, cooperation और sustainability पर है।
निष्कर्ष: मोदी-शी बैठक भारत-चीन रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन असली खबर बैठक की तस्वीर नहीं बल्कि बैठक के बाद सामने आने वाला ठोस परिणाम होगा



