बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे नगर निगम (PMC) को एक बड़ा झटका देते हुए विट्ठलवाड़ी स्थित आवासीय इमारत के विध्वंस मामले में दायर उसकी दूसरी अपील को खारिज कर दिया है। इससे पहले ट्रायल कोर्ट और प्रथम अपील अदालत—दोनों ने PMC की कार्रवाई को अवैध करार देते हुए फ्लैट खरीदारों को ₹16,91,602 मुआवजा देने का आदेश दिया था।
न्यायमूर्ति एस. एम. मोडक ने अपने आदेश में कहा कि PMC की दूसरी अपील में कोई भी “महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न” (substantial question of law) नहीं उठाया गया था, जो कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 100 के तहत दूसरी अपील स्वीकार करने के लिए अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब निचली अदालतें तथ्यों और कानून के आधार पर सही निष्कर्ष पर पहुंच चुकी हैं, तो दूसरी अपील का कोई आधार ही नहीं बचता।
इस फैसले के बाद न केवल अवैध विध्वंस की पुष्टि हो गई, बल्कि फ्लैट खरीदारों को मुआवजा देने का आदेश भी बरकरार रहा है। यह मामला नगर निकायों द्वारा की जाने वाली कार्यवाही पर न्यायिक नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।


