न्यूयॉर्क: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में यह टिप्पणी की. भारत की विदेश नीति और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद लंबे समय से भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय रहा है.
विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि साझेदार देशों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाते हुए भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं को भी महत्व देता है. उनके मुताबिक, किसी देश के साथ द्विपक्षीय रिश्ते सिर्फ व्यापार, निवेश या राजनयिक सहयोग तक ही सीमित नहीं होते, बल्कि सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दे भी उनकी दिशा तय करते हैं.
आतंकवाद पर भारत का रुख
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है. नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में देशों के बीच सहयोग और स्पष्ट समझ जरूरी है.
जयशंकर के ताजा बयान ने भी इसी चिंता को रेखांकित किया है. उन्होंने संकेत दिया कि जब भारत की सुरक्षा चिंताओं को साझेदार देशों से पर्याप्त महत्व नहीं मिलता है, तो यह उनके साथ भारत के संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
द्विपक्षीय संबंधों में सुरक्षा का महत्व
विदेश मंत्री के बयान के अनुसार, भारत विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों को व्यापक आधार पर देखता है। व्यापार और आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं.
जयशंकर ने कहा कि भारत के भागीदारों के लिए इसकी प्रमुख सुरक्षा चिंताओं को समझना आवश्यक है. आतंकवाद से संबंधित मुद्दों पर सहयोग और भारत की चिंताओं को समझना द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारकों में से एक है।
आतंकवाद का मुद्दा लंबे समय से भारत की विदेश नीति का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। जयशंकर का बयान ऐसे समय आया है जब भारत विभिन्न देशों के साथ अपने रणनीतिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।




