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BIHAR CONGRESS सदाकत आश्रम में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, बूथ से लेकर प्रदेश तक संगठन को मजबूत करने की कवायद

Jun 6, 2026
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BIHAR CONGRESS सदाकत आश्रम में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, बूथ से लेकर प्रदेश तक संगठन को मजबूत करने की कवायद

Photo: The Media Times / Representative Image

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The Media Times
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द मीडिया टाइम्स डेस्क, 6 जून

Congress News : बिहार की सियासत में आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए कांग्रेस ने अपने संगठन को धार देने की कवायद तेज कर दी है। इसी कड़ी में आज पटना स्थित सदाकत आश्रम में बिहार कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई है। बैठक की अध्यक्षता बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम कर रहे हैं, जबकि बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु भी इसमें विशेष रूप से मौजूद हैं।
‘ संगठन सृजन साथी अभियान’ के तहत बुलाई गई इस अहम बैठक में प्रदेश के सभी 53 सांगठनिक जिलों के जिलाध्यक्ष हिस्सा ले रहे हैं। बैठक का मुख्य एजेंडा संगठन विस्तार अभियान की समीक्षा, जमीनी स्तर पर हुए कार्यों का मूल्यांकन और आगामी रणनीति को अंतिम रूप देना है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए गठन को लेकर भी अहम फैसला लिया जा सकता है। दरअसल, 12 मई को हुई पिछली बैठक में प्रदेश नेतृत्व ने संगठन निर्माण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। उस दौरान प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने घोषणा की थी कि 20 जून तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी और सभी जिला कमिटियों का गठन पूरा कर लिया जाएगा।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि प्रखंड स्तर तक संगठन सृजन का कार्य तय समय सीमा में पूरा करना अनिवार्य है और अनुशासनहीनता के मामले में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठन ही चुनावी लड़ाई की सबसे बड़ी ताकत होता है। यही वजह है कि पार्टी बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु पहले ही संकेत दे चुके हैं कि पार्टी में मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को उनकी क्षमता के अनुसार जिम्मेदारी दी जाएगी, चाहे वे नए हों या पुराने। उन्होंने सेकेंड लाइन नेतृत्व को आगे बढ़ाने और युवा चेहरों को अवसर देने की नीति पर जोर दिया है।
संगठन सृजन साथी अभियान को सफल बनाने के लिए कांग्रेस ने राज्य के 53 सांगठनिक जिलों में 155 जिला पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की थी। इन पर्यवेक्षकों को संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई थी। साथ ही पार्टी की परिसंपत्तियों को अतिक्रमण और भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराने की योजना पर भी काम चल रहा है। ऐसे में सदाकत आश्रम की यह बैठक केवल समीक्षा तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे बिहार कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्गठन और आगामी राजनीतिक रणनीति की दिशा तय करने वाली अहम कवायद के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इसके असर बिहार की सियासत में साफ दिखाई दे सकते हैं।

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