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महाराष्ट्र: बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अजित पवार का अंतिम संस्कार, अमित शाह और नवीन पटनायक हुए शामिल

महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। बुधवार को उनके पैतृक शहर बारामती में पूरे राजकीय सम्मान…

Jan 29, 2026
2 min read
महाराष्ट्र: बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अजित पवार का अंतिम संस्कार, अमित शाह और नवीन पटनायक हुए शामिल

Photo: The Media Times / Representative Image

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महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। बुधवार को उनके पैतृक शहर बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। जनसैलाब उमड़ पड़ा और हर आंख नम दिखाई दी।

अजित पवार का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ अंतिम संस्कार स्थल तक लाया गया। पुलिस बैंड द्वारा राष्ट्रधुन बजाई गई और गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। राज्य सरकार की ओर से सभी सरकारी औपचारिकताओं का पालन करते हुए उनका अंतिम संस्कार किया गया।

इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, कई केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। सभी नेताओं ने पुष्प अर्पित कर अजित पवार को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

अमित शाह ने कहा कि अजित पवार एक कर्मठ, ईमानदार और जनसेवा के प्रति समर्पित नेता थे। उन्होंने हमेशा किसानों, युवाओं और आम जनता की भलाई के लिए काम किया। उनका जाना देश और महाराष्ट्र की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।

वहीं, नवीन पटनायक ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अजित पवार का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सभी वर्गों के लिए काम किया।

अंतिम संस्कार के दौरान अजित पवार के समर्थकों ने “अमर रहें” के नारे लगाए और भावुक माहौल में उन्हें विदाई दी। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। उनके चाहने वालों ने फूलों और मोमबत्तियों से श्रद्धांजलि अर्पित की।

अजित पवार ने अपने राजनीतिक जीवन में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं और जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। वे सरल स्वभाव, मजबूत नेतृत्व और निर्णायक क्षमता के लिए जाने जाते थे।

उनके निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया है। लोग उन्हें एक जमीनी नेता और सच्चे जनसेवक के रूप में हमेशा याद रखेंगे।

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