नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने डार्क मैटर का अब तक का सबसे उच्च-स्तरीय (हाई-रेजोल्यूशन) नक्शा तैयार किया है, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि ब्रह्मांड में तारों, आकाशगंगाओं और ग्रहों के निर्माण में इसकी अहम भूमिका रही है। डार्क मैटर को अक्सर “ब्रह्मांड का अदृश्य ढांचा” कहा जाता है, क्योंकि यह दिखाई नहीं देता, लेकिन इसके बिना ब्रह्मांड की संरचना संभव नहीं होती।
डार्क मैटर सामान्य पदार्थ से बिल्कुल अलग होता है। यह न तो रोशनी को अवशोषित करता है और न ही परावर्तित करता है, इसलिए इसे सीधे तौर पर देखा नहीं जा सकता। यही कारण है कि इसे ‘डार्क’ यानी अंधकारमय पदार्थ कहा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, बिग बैंग के समय बने कुल पदार्थ का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर ही है।
हालांकि, डार्क मैटर दिखाई नहीं देता, लेकिन इसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव बेहद शक्तिशाली होता है। यह आकाशगंगाओं को एक-दूसरे से बिखरने से रोकता है और उन्हें एक साथ बांधे रखता है। इसी गुरुत्वाकर्षण के कारण गैस और धूल के बादल इकट्ठा होते हैं, जिससे तारों और ग्रहों का निर्माण संभव हो पाता है।
यह नया नक्शा प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर एस्ट्रोनॉमी’ में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस मैप के माध्यम से पहली बार इतने स्पष्ट रूप से यह देखा जा सका है कि डार्क मैटर किस तरह ब्रह्मांड की संरचना को आकार देता है। यह अध्ययन आधुनिक टेलीस्कोप और उन्नत कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से किया गया है।
वैज्ञानिकों ने इस शोध में “ग्रैविटेशनल लेंसिंग” तकनीक का उपयोग किया, जिसमें दूर स्थित आकाशगंगाओं से आने वाली रोशनी डार्क मैटर के प्रभाव से मुड़ जाती है। इसी प्रक्रिया के आधार पर वैज्ञानिकों ने डार्क मैटर के वितरण का अनुमान लगाया।
इस शोध से न केवल ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विकास को समझने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े नए रहस्यों को भी सुलझाया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज खगोल विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।
कुल मिलाकर, यह अध्ययन दर्शाता है कि भले ही डार्क मैटर दिखाई न देता हो, लेकिन ब्रह्मांड की संरचना और विकास में इसकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में इस पर और गहराई से शोध किए जाने की उम्मीद है।
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