2022 वर्ष के अंतिम दिन को आध्यात्मिक अनुभव के लिए सुरक्षित रखने का मेरा विचार दिसंबर महीने के शुरुआत से ही प्रारंभ हुआ। नियत दिन के मुताबिक 30 -31 दिसंबर को त्रंबकेश्वर की यात्रा पर निकलते ही मन धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव से ओतप्रोत हो गया।
महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित त्रंबकेश्वर भगवान का मंदिर अपने महात्म्य के लिए कितना प्रसिद्ध है उतना ही अपने वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव के उन बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है जिन्हे भारत में सबसे अधिक पूजा जाता है।
शाम के पांच बजे मंदिर में हजारों शिव भक्तों की भीड़ देखते ही ऐसा प्रतीत हुआ मानो हम किसी विराट शिव दर्शन के दर पर सरलता से पहुंच गए हैं।200 रुपए में वीआईपी पास लेकर हम शिव भक्तों के लाइन में लगे तो मन शिवमय हो उठा। कोई आधे घंटे की प्रतीक्षा के बाद खुद को शिव त्रिदेव के 10वे लिंग के दर्शन हेतु मेरा शिव भक्ति में डूब जाना कोई आश्चर्य नहीं था क्योंकि हर भारतीय मंदिर में शिवमय होकर जय जयकार की गुहार लगा रहा था।
शिवलिंग का दर्शन करता ही आप एक नए उमंग , ऊर्जा और शक्ति का अनुभव करेंगे यही शिव भक्ति की शक्ति है जिसे लाखों लोग त्रंबकेश्वर दर्शन को प्रति वर्ष आते हैं।
मंदिर के पास ही ब्रह्मगिरी पर्वत से पुण्य गोदावरी नदी निकलती है।उत्तर भारत मेने गंगा का महत्व है वही दक्षिण भारत में गोदावरी का महत्व है।वैसे गोदावरी का प्रवाह ऋषि गौतम जी के महान तपस्या का फल है जो उन्हें भगवान आशुतोष से प्राप्त हुआ।
त्रंबकेश्वर में वृहस्पति के सिंह राशि आने पर यहां बड़ा कुंभ मेला लगता है और भक्त गण गौतमी गंगा में स्नान कर श्री त्रंबकेश्वर का दर्शन कर अपने को कृत्य मानते हैं।
सभी देवताओं और गौतम ऋषि कि प्रार्थना पर भगवान शिव ने इस स्थान पर निवास करने का निश्चय किया और त्रंबकेश्वर के नाम से विख्यात हुए।
त्रंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की सबसे अद्भुत बात यह है की इसके तीन मुख हैं जिसमें एक भगवान ब्रह्मा,एक विष्णु और एक रुद्र का रूप माना जाता है।
त्रंबकेश्वर मंदिर काले पत्थरों से निर्मित है।इस मंदिर की वास्तुकला बहुत ही अद्भुत है और सिंधु आर्यशैली का अद्भुत नमूना है। आप यहां अन्य पर्यटन स्थलों में नीलगिरी और केदारनाथ मंदिर के रिपेलिका का दर्शन कर सकते हैं।

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