दीर अल-बलाह (गाजा पट्टी),गाजा पट्टी में शनिवार तड़के इजराइल की ओर से किए गए हवाई और जमीनी हमलों में कम से कम 12 फलस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय अस्पतालों के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें गंभीर हालत में विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, हमले गाजा के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में किए गए, जिनमें आवासीय इलाकों को भी निशाना बनाया गया। हमलों के बाद कई इमारतें मलबे में तब्दील हो गईं, जिससे राहत और बचाव कार्य में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अचानक हुए इन हमलों के कारण इलाके में दहशत का माहौल फैल गया।
गौरतलब है कि अक्टूबर महीने में संघर्ष रोकने के लिए हुए समझौते के बाद यह उन सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है, जिनमें इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। इस संघर्षविराम के बाद अपेक्षा की जा रही थी कि क्षेत्र में हालात कुछ हद तक सामान्य होंगे, लेकिन हालिया घटनाओं ने एक बार फिर शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कुछ घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है। अस्पताल पहले से ही संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहे हैं और दवाइयों, ईंधन तथा चिकित्सा उपकरणों की कमी के कारण उपचार में कठिनाइयाँ आ रही हैं।
इधर, इजराइली सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ये हमले “सुरक्षा कारणों” से किए गए और उनका उद्देश्य कथित तौर पर उग्रवादी ठिकानों को निशाना बनाना था। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और मानवाधिकार संगठनों ने दावा किया है कि हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिक प्रभावित हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने गाजा में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई है और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। कई संगठनों ने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संघर्षविराम का सम्मान करने की मांग दोहराई है।
गाजा पट्टी में लंबे समय से जारी संघर्ष के चलते पहले ही मानवीय संकट गहराया हुआ है। हालिया हमलों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र में स्थायी शांति की राह अब भी बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।


