इंदौर:
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पेयजल से हुई कई मौतों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) न सिर्फ विपक्ष के हमलों का सामना कर रही है, बल्कि पार्टी के भीतर से भी आलोचनात्मक स्वर उभरने लगे हैं। कई नेताओं ने इसे प्रशासन की “अक्षम्य लापरवाही” करार दिया है।
पानी की शिकायतें, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कई हफ्तों से पानी की बदबू, गंदगी और रंग को लेकर शिकायतें की जा रही थीं। कुछ इलाकों में नलों से बदबूदार और गंदा पानी आने की बात सामने आई थी, लेकिन समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत या जल आपूर्ति रोकने जैसे कदम नहीं उठाए गए। नतीजा यह हुआ कि कई लोगों की तबीयत बिगड़ी और कुछ की जान चली गई।
विपक्ष का तीखा हमला
घटना के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि स्मार्ट सिटी और विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की गई। कांग्रेस नेताओं ने इसे “प्रशासनिक विफलता” बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और मंत्रियों पर कार्रवाई की मांग की है।
बीजेपी के भीतर भी असंतोष
इस मामले ने बीजेपी के भीतर भी बेचैनी बढ़ा दी है। पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि समय पर शिकायतों पर ध्यान दिया गया होता तो जानें बच सकती थीं। एक वरिष्ठ नेता ने इसे “गंभीर पाप” बताते हुए कहा कि जनता के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
प्रशासन की सफाई
नगर निगम और जिला प्रशासन का कहना है कि पानी के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं और प्रभावित इलाकों में वैकल्पिक जल आपूर्ति की जा रही है। साथ ही दोषी पाइपलाइनों की पहचान कर उन्हें बदला जा रहा है। प्रशासन ने दावा किया है कि मामले की जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भरोसे की परीक्षा
इंदौर की यह घटना सरकार और प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गई है। सवाल यह है कि क्या दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई होगी या मामला समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा। फिलहाल, दूषित पानी से हुई मौतों ने शासन और प्रशासन दोनों की जवाबदेही पर गहरा सवालिया निशान लगा दिया है।




