जमशेदपुर: कोल्हान क्षेत्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है. कुत्तों के झुंड अब आम तौर पर सड़कों पर, बाजारों में और जमशेदपुर समेत शहरी और आवासीय इलाकों में गलियों में देखे जाते हैं। नतीजतन, लोग हमलों और कुत्तों के काटने की घटनाओं से भयभीत रहते हैं.
राज्य में कुत्तों के काटने के मामलों की संख्या भी स्थिति की गंभीरता की ओर इशारा करती है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी और जून 2026 के बीच रांची सदर अस्पताल में कुत्ते के काटने के 52,669 मामले दर्ज किए गए। बड़ी संख्या में लोग हर दिन एंटी-रेबीज टीके और इलाज के लिए अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं।
स्थायी व्यवस्था का इंतजार
कोल्हान के विभिन्न नागरिक क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या पर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। इन पर नियंत्रण के लिए नसबंदी, बचाव और सुरक्षित प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत महसूस की जा रही है। लोगों का कहना है कि किसी घटना के बाद सिर्फ टीकाकरण या इलाज से समस्या का स्थायी समाधान नहीं मिल पाएगा.
बाजारों और रिहायशी इलाकों में बढ़ा खतरा
जमशेदपुर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड देखे जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं. सुबह और शाम को पैदल चलने वाले लोगों, बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को तब कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है जब कुत्ते अचानक उनकी ओर दौड़ते हैं या उनका पीछा करते हैं।
कुत्ते के काटने की स्थिति में, विशेषज्ञ घाव को तुरंत बहते पानी से धोने और समय पर चिकित्सा सलाह लेने की सलाह देते हैं। रेबीज एक घातक बीमारी है, लेकिन समय पर उपचार और निर्धारित टीकाकरण से इसे रोकने में मदद मिल सकती है।
अब कोल्हान में स्थानीय निकायों को आवारा कुत्तों की संख्या, बंध्याकरण, बचाव और उपचार की व्यवस्था के संबंध में एक ठोस और स्थायी कार्य योजना तैयार करने की आवश्यकता है, ताकि सार्वजनिक सुरक्षा के साथ-साथ पशु कल्याण भी सुनिश्चित किया जा सके।




