मुंबई: (4 फरवरी) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बुधवार को कहा कि अमेरिका जैसे देशों के साथ व्यापार समझौतों के जरिए व्यापारिक तनाव समाप्त होने से आर्थिक अनिश्चितताएं कम होती हैं, जिससे देश में पूंजी निर्माण की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौते निवेशकों का भरोसा बढ़ाते हैं और निवेश से जुड़े फैसलों को प्रोत्साहित करते हैं।
यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान सेबी चेयरमैन से यह सवाल पूछा गया था कि क्या अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से विदेशी निवेशकों द्वारा भारत में अधिक पूंजी लगाने की संभावना बढ़ेगी। इस पर पांडे ने कहा कि इस तरह के कदम निवेश निर्णयों को “स्पर” यानी गति देने का काम करते हैं।
तुहिन कांत पांडे ने कहा, “मूल रूप से जब किसी नियामकीय कार्रवाई से जुड़ी अनिश्चितता समाप्त होती है और व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं, तो पूंजी निर्माण की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से तेज हो जाती है।” उनके अनुसार, निवेशक हमेशा स्थिर और स्पष्ट नीतिगत वातावरण की तलाश में रहते हैं, और व्यापार समझौते इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक स्तर पर व्यापारिक तनाव और संरक्षणवादी नीतियां निवेश के प्रवाह को प्रभावित करती हैं। ऐसे में जब दो बड़े आर्थिक साझेदार देश आपसी व्यापार समझौते करते हैं, तो इससे न केवल व्यापार बढ़ता है, बल्कि निवेशकों को यह संकेत भी मिलता है कि संबंधित अर्थव्यवस्था दीर्घकालिक स्थिरता और विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
सेबी चेयरमैन का मानना है कि भारत के लिए यह समय खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और वित्तीय बाजारों में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। विदेशी निवेश के साथ-साथ घरेलू पूंजी निर्माण भी आर्थिक विकास के लिए जरूरी है, और इसके लिए नीतिगत स्पष्टता अनिवार्य है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नियामकीय स्तर पर सुधार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में मजबूती से भारत के पूंजी बाजारों को मजबूती मिलेगी। इससे न केवल विदेशी संस्थागत निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि घरेलू निवेशकों के लिए भी बेहतर अवसर पैदा होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदार के साथ समझौते से भारत की वैश्विक छवि मजबूत होगी और ‘मेक इन इंडिया’ तथा अन्य विकास योजनाओं को भी गति मिल सकती है। कुल मिलाकर, सेबी चेयरमैन के बयान से यह स्पष्ट होता है कि व्यापार समझौते केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहते, बल्कि व्यापक आर्थिक विकास और पूंजी निर्माण में भी अहम भूमिका निभाते हैं।




