बेंगलुरु: कर्नाटक विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल (सेक्युलर) [जेडीएस] के विधायकों ने सदन के भीतर धरना शुरू कर दिया। विपक्षी दलों ने राज्य के आबकारी मंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की।
बीजेपी और जेडीएस विधायकों का आरोप है कि आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और इससे जुड़े मामलों में मंत्री की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विपक्ष का कहना है कि जब तक मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक किसी भी जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इसी मांग को लेकर विधायकों ने सदन की कार्यवाही बाधित की और नारेबाजी की।
धरने के दौरान विपक्षी विधायक वेल में आ गए और हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इससे विधानसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने की कोशिश कर रही है और जवाबदेही से बच रही है।
बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में शराब ठेकों, लाइसेंस आवंटन और राजस्व वसूली से जुड़े मामलों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। उनका दावा है कि इससे राज्य को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। जेडीएस विधायकों ने भी बीजेपी के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीति का नहीं, बल्कि जनता के हित और पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है।
वहीं, सत्तारूढ़ कांग्रेस ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विपक्ष बिना किसी ठोस सबूत के मंत्री को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो जांच से पीछे नहीं हटेगी, लेकिन केवल राजनीतिक दबाव में आकर इस्तीफा देना उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री की ओर से भी यह संकेत दिया गया कि सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है और सदन में चर्चा से भाग नहीं रही है। हालांकि, हंगामे के चलते दिन भर सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए विपक्ष इस मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला कर्नाटक की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।




