प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को भारत के तेजी से बढ़ते ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक निवेशकों को निवेश करने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत का ऊर्जा क्षेत्र लगभग 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के अवसर प्रदान करता है और आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा।
27 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ऊर्जा उत्पादन, वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। सरकार की नीतियों और योजनाओं के कारण यह क्षेत्र निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक बन गया है। उन्होंने बताया कि भारत स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा बाजारों में से एक बन चुका है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिक विकास और शहरीकरण के कारण ऊर्जा की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने बिजली, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हाइड्रोजन और बायो-एनर्जी जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा दिया है।
उन्होंने विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर देते हुए कहा कि भारत ने वर्ष 2070 तक ‘नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन’ का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं, इलेक्ट्रिक वाहनों और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन पर तेजी से काम किया जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि सरकार निवेशकों को बेहतर बुनियादी ढांचा, पारदर्शी नीतियां और सरल प्रक्रियाएं उपलब्ध करा रही है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी योजनाओं से ऊर्जा क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला है।
उन्होंने वैश्विक कंपनियों से अपील की कि वे भारत को अपने निवेश का प्रमुख केंद्र बनाएं। भारत में स्थिर सरकार, मजबूत अर्थव्यवस्था और कुशल मानव संसाधन उपलब्ध है, जो निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि एक मजबूत निवेश गंतव्य के रूप में और मजबूत होगी। इससे देश में नई परियोजनाएं शुरू होंगी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश भारत के ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं को दर्शाता है। 500 अरब डॉलर के निवेश अवसर न केवल देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि भारत को वैश्विक ऊर्जा हब बनाने में भी मदद करेंगे।




