नई दिल्ली। खैरताबाद के पूर्व विधायक दानम नागेंद्र ने तेलंगाना विधानसभा के सदस्य के रूप में अपनी अयोग्यता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 18 सितंबर को दलबदल विरोधी कानून के तहत उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया था और खैरताबाद विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया था। नागेंद्र ने फैसले को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है.
वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया और जल्द सुनवाई की मांग की. पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट याचिका को 23 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमत हो गया है।
यह मामला नागेंद्र की राजनीतिक स्थिति से संबंधित अयोग्यता याचिकाओं से उत्पन्न हुआ है। नागेंद्र 2023 में बीआरएस टिकट पर खैरताबाद से विधायक चुने गए थे। बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए और कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में सिकंदराबाद से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा। बाद में दलबदल विरोधी कानून के तहत उनके खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही की मांग की गई।
तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद कुमार ने 11 मार्च, 2026 को नागेंद्र के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इस फैसले को तब तेलंगाना उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई थी। 18 सितंबर को, उच्च न्यायालय की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने स्पीकर के आदेश को रद्द कर दिया, नागेंद्र को 23 अप्रैल, 2024 से अयोग्य घोषित कर दिया और खैरताबाद सीट को खाली घोषित कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट अब नागेंद्र की याचिका पर सुनवाई करेगा। इस बीच, बीआरएस विधायक पाडी कौशिक रेड्डी और बीजेपी विधायक अलेटी महेश्वर रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कैविएट दायर की है, और मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले सुनवाई का अवसर मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई तेलंगाना उच्च न्यायालय के अयोग्यता आदेश के संबंध में अगले कानूनी चरण का निर्धारण करेगी।



